माघ मास 2026 (Magh Snan 2026) का आरंभ 3 जनवरी से हो चुका है। सनातन परंपरा में इस मास को स्नान, दान और साधना का विशेष काल माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ स्नान आत्मशुद्धि और पापक्षय का प्रमुख साधन है।
घर पर माघ स्नान करने की विधि और नियम (Magh Snan 2026)
पानी में मिलाएं गंगा जल
अगर आप नदी तक नहीं जा सकते, तो नदी को अपने पास ले आएं. नहाने के सामान्य पानी में थोड़ा सा गंगा जल मिलाएं. शास्त्रों के अनुसार, श्रद्धापूर्वक गंगा जल मिलाकर स्नान करने से वह जल गंगा के समान ही पवित्र और फलदायी हो जाता है.
ब्रह्म मुहूर्त का पालन करें
माघ मास में स्नान का समय बहुत महत्वपूर्ण है. सूर्योदय से पूर्व, यानी ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना सबसे उत्तम माना गया है. सुबह की ठंडी हवा और शांत वातावरण में स्नान करने से न केवल पुण्य मिलता है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है.
सप्त नदियों का स्मरण
स्नान करते समय भारत की सात पवित्र नदियों का ध्यान करें. जल को स्पर्श करते हुए इस मंत्र या इन नदियों के नाम का जाप करें. मान्यता है कि इन नदियों के स्मरण मात्र से आपके घर का जल तीर्थ जल में परिवर्तित हो जाता है.
तिल का विशेष प्रयोग
माघ मास और तिल का गहरा संबंध है. स्नान के पानी में काले तिल डालकर नहाएं. इसके अलावा शरीर पर तिल का उबटन लगाना भी बहुत शुभ माना जाता है. इससे शनि दोषों से मुक्ति मिलती है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
पूजन और मंत्र जाप करें
स्नान केवल शरीर की शुद्धि नहीं, बल्कि मन की शुद्धि भी है. स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें. पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय‘ मंत्र का जाप करें.
माघ मास में दान का भी है महत्व
स्नान के बाद सामर्थ्य अनुसार तिल, गुड़, कंबल या अन्न का दान जरूर करें. घर पर रहकर भी यदि आप नियम और पूरी श्रद्धा के साथ इन कार्यों को करते हैं, तो आपको वही फल प्राप्त होता है जो एक तीर्थ यात्री को मिलता है.

