7 गांवों के किसानों ने 5 घंटे किया धरना प्रदर्शन, अधिकारियों के आश्वासन पर माने

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                                   मामला वर्धा डेम की नहर का पानी नही मिलने तथा गांवों में सड़कें नही बनने का

Betul Ki Khabar/मुलताई। वर्धा जलाशय की नहर से बांध के समीप के गांवों को ही लाभ नही मिलने का मुद्दा दिनों दिन गहराता जा रहा है। पूर्व में तहसील कार्यालय में चौथिया सहित सात गांवों के ग्रामीणों द्वारा प्रदर्शन के बाद अधिकारियों का संतोषप्रद जवाब नही मिलने से सोमवार मुलताई से प्रभात पट्टन मार्ग पर स्थित ग्राम चौथिया मुख्य मार्ग पर फिर चौथिया, गोपाल तलाई, जामगांव, सोनोली, खरसाली, बिछुआ, सांडिया के ग्रामीणों ने धरना प्रदर्शन किया तथा मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की। सोमवार सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक ग्रामीणों द्वारा विरोध प्रदर्शन जताया गया जिसके बाद मौके पर एसडीएम राजीव कहार तथा जल संसाधन विभाग के उपयंत्री नागले के पहुंचने एवं आश्वासन देने के बाद फिलहाल धरना प्रदर्शन स्थगित कर दिया गया है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे उक्त क्षेत्र के जनपद सदस्य अजय बारस्कर सहित अन्य लोगों ने बताया कि विगत लंबे समय से नहर ग्रामीणों द्वारा प्रदर्शन किया जा रहा है इसके बावजूद अधिकारियों के द्वारा समस्या का समाधान नही किया जा रहा है जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। ग्रामीणों ने बताया कि वर्धा जलाशय की नहर का लाभ बड़ी संख्या में गांवों को मिल रहा है लेकिन आसपास के गांवों को नही मिल रहा है जबकि सबसे पहले आसपास के गांवों के किसानों को मिलना चाहिए था। उन्होने कहा कि जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के द्वारा पक्षपात किया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि जब तक हमारे गांवों को नहर का पानी नही मिलेगा तब तक प्रदर्शन किया जाते रहेगा। ग्रामीणों ने बताया कि लगातार गुहार लगाने के बावजूद जनप्रतिनिधिगण तथा अधिकारी समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं जिससे रोष बढ़ता जा रहा है।

ब्लू बेरी प्लांट को दिया जा रहा नियम विरूद्ध पानी

ग्रामीणों ने बताया कि एक तरफ जहां किसान नहर के पानी के लिए आंदोलन कर रहे हैं वहीं अधिकारियों की सांठ गांठ से डहरगांव के पास स्थित ब्लू बेरी प्लांट को नियम विरूद्ध तरीके से पानी दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि सर्वप्रथम आसपास के गांवों के किसानो को पानी मिलना चाहिए जबकि निजी कंपनी को अवैध रूप से पानी दिया जा रहा है। ऐसी स्थिति में अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है वहीं जल संसाधन विभाग के अधिकारी संतोषप्रद जवाब नही दे रहे हैं।

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गांवों में सड़कों का निर्माण नही होने से परेशान ग्रामीण

आंदोलन कर रहे ग्रामीणों ने बताया कि गांवों में सड़क नही होने से उन्हे लंबा चक्कर लगाकर सोसायटी तथा राशन लेने जाना पड़ता है। जनपद सदस्य बारस्कर ने बताया कि सोनोली से जामगांव तक एक किलोमीटर तक कच्चा मार्ग है जिसका निर्माण आवश्यक है। उक्त कच्चे मार्ग से सोनोली के ग्रामीणों को राशन लेने जामगांव जाना पड़ता है जिससे बारिश में उक्त मार्ग पर कीचड़ होने से चक्कर लगाकर जामगांव राशन लेने जाना पड़ता है। सांडिया में सोसाइटी होने से जामगांव के किसानों को खाद बीज लेने जाना पड़ता है जो सड़क कच्ची होने से परेशानी उठाना पड़ता है। इस दौरान ग्रामीणों को अन्य मार्ग से जाने में लगभग 15 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। ग्राम गोपाल तलाई में मोक्षधाम तक मार्ग कच्चा होने से अंतिम संस्कार के लिए जाने वाले लोगों को हर बार परेशान होना पड़ता है तथा विशेष रूप से बारिश के दौरान मोक्षधाम पहुंचने में भारी समस्या का सामना करना पड़ता है।

एसडीएम तथा ऐरिगेशन के उपयंत्री ने दिया आश्वासन

ग्रामीणों द्वारा मार्ग पर चक्काजाम की चेतावनी देने के बाद एसडीएम राजीव कंहार तथा जल संसाधन विभाग के एसके नागले मौके पर पहुंचे तथा ग्रामीणों की समस्या सुनी। जनपद सदस्य अजय बारस्कर एवं ग्रामीणों द्वारा उन्हे समस्याओं से अवगत कराने पर उपयंत्री एसके नागले ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया है कि वे नहर को पानी उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं वहीं सड़कों की समस्या पर एसडीएम राजीव कहार ने कहा कि यदि पंचायत में बजट नहीं है तो वे उच्चाधिकारियों से उक्त समस्या से अवगत कराएंगे ताकि सड़क निर्माण के लिए अन्य मद से राशि आ सके।

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