Income Tax New Rules: टैक्सपेयर्स के लिए बड़ा बदलाव, 1 अप्रैस से बदल जाएंगे Form 16 और 26AS

By betultalk.com

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Income Tax New Rules:- आयकर प्रणाली में बदलाव की दिशा में सरकार ने ड्राफ्ट इनकम टैक्स नियम 2026 जारी कर दिए हैं। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू किए जा सकते हैं, जिनमें कई टैक्स फॉर्म्स के नंबर बदलने की तैयारी की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नए Income Tax Act 2026 को फिलहाल हितधारकों की राय लेने के लिए जारी किया गया है। टैक्स विशेषज्ञों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का कहना है कि ये बदलाव मुख्य रूप से प्रशासनिक और संरचनात्मक हैं, जिससे प्रक्रियाओं को आसान बनाने की कोशिश की जा रही है।

प्रस्ताव के अनुसार, मौजूदा फॉर्म 16 को बदलकर फॉर्म 130 और फॉर्म 26AS को फॉर्म 168 किए जाने की चर्चा है। हालांकि, इन बदलावों को लेकर अभी आधिकारिक अधिसूचना जारी होना बाकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि फॉर्म नंबर बदलने के बावजूद टैक्सपेयर्स के लिए रिपोर्टिंग प्रक्रिया या फॉर्मेट में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा।

क्या होगा असर?

टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि वेतनभोगी कर्मचारियों, नियोक्ताओं और करदाताओं के लिए फॉर्म का मकसद, सामग्री और समय-सीमा लगभग पहले जैसी ही रहेगी। बदलाव मुख्य रूप से नए कानून के तहत फॉर्म्स के पुनर्गठन से जुड़े हैं। टैक्स वर्ष 2026-27 से संबंधित सभी अनुपालन और संचार नए क्रमांकित फॉर्म्स के तहत किए जाने की संभावना है। हालांकि, अंतिम क्रियान्वयन आयकर पोर्टल की तकनीकी तैयारी और आधिकारिक अधिसूचना पर निर्भर करेगा। टैक्सपेयर्स को 1 अप्रैल से नए नियमों से रू-ब-रू होना पड़ेगा।

क्या मिलेगा ट्रांजिशन पीरियड?

रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार पुराने और नए फॉर्म नंबरों को कुछ समय तक समानांतर रूप से चलाने की अनुमति दे सकती है, ताकि करदाताओं को अचानक बदलाव से परेशानी न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआत में थोड़ी भ्रम की स्थिति बन सकती है, लेकिन अगर सरकार की ओर से स्पष्ट दिशानिर्देश और विस्तृत FAQs जारी किए जाते हैं, तो यह बदलाव सहज रूप से लागू हो सकता है। फिलहाल, सीबीडीटी ने ड्राफ्ट कानून पर हितधारकों से सुझाव और टिप्पणियां आमंत्रित की हैं। उम्मीद है कि संसद 1 अप्रैल से पहले इस कानून को पारित कर सकती है। आने वाले दिनों में CBDT की ओर से संशोधित फॉर्म्स को लेकर विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए जाने की संभावना है, जिससे करदाताओं को नई व्यवस्था को समझने में सहूलियत मिलेगी।

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