Tamatar ki kheti:- देश में किसान बड़े स्तर पर टमाटर की खेती करते हैं, क्योंकि यह ऐसी सब्जी है जिसकी मांग पूरे साल बनी रहती है। सब्जी, सॉस, केचअप और प्रोसेस्ड फूड इंडस्ट्री में भारी उपयोग के कारण टमाटर की खपत भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में सबसे ज्यादा होती है। यही वजह है कि टमाटर की खेती किसानों के लिए मुनाफे का सौदा बनती जा रही है।
भारत दुनिया के प्रमुख टमाटर उत्पादक देशों में शामिल है और इसकी खेती कम समय में अच्छी आमदनी देने वाली फसलों में गिनी जाती है।
टमाटर की बुवाई का सही समय
- जनवरी में टमाटर के पौधे की रोपाई के लिए किसान नवंबर माह के अंत में टमाटर की नर्सरी तैयार कर सकते हैं। पौधों की रोपाई जनवरी के दूसरे सप्ताह में करना चाहिए।
- यदि आप सितंबर में इसकी रोपाई करना चाहते हैं तो इसकी नर्सरी जुलाई के अंत में तैयार करें। पौधे की बुवाई अगस्त के अंत या सितंबर के पहले सप्ताह में करें।
- मई में इसकी रोपाई के लिए मार्च और अप्रैल माह में नर्सरी तैयार करें। पौधे की बुवाई अप्रैल और मई माह में करें।
टमाटर की पौधे कैसे तैयार करें
खेत में रोपने से पहले टमाटर के पौधे नर्सरी में तैयार किए जाते हैं। इसके लिए नर्सरी को 90 से 100 सेंटीमीटर चौड़ी और 10 से 15 सेंटीमीटर उठी हुई बनाना चाहिए। इससे नर्सरी में पानी नहीं ठहरता है। वहीं निराई-गुड़ाई भी अच्छी तरह हो जाती है। बीज को नर्सरी में 4 सेंटीमीटर की गहराई में बोना चाहिए। टमाटर के बीजों की बुवाई करने के बाद हल्की सिंचाई करनी चाहिए। बीज की नर्सरी में बुवाई से पहले 2 ग्राम केप्टान से उपचारित करना चाहिए। वहीं खेत में 8-10 ग्राम कार्बोफुरान 3 जी प्रति वर्गमीटर के हिसाब से डालना चाहिए। टमाटर के पौधे जब 5 सप्ताह बाद 10-15 सेंटीमीटर के हो जाए तब इन्हें खेत में बोना चाहिए। यदि आप एक एकड़ में टमाटर की खेती करना चाहते हैं तो इसके लिए टमाटर के 100 ग्राम बीज की आवश्यकता होगी।
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टमाटर की खेती का तरीका
खेत को 3-4 बार जोतकर अच्छी तरह तैयार कर लें। पहली जुताई जुलाई माह में मिट्टी पलटने वाले हल अथवा देशी हल से करें। खेत की जुताई के बाद समतल करके 250-300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से सड़ी गोबर की खाद को समान रूप से खेत में बिखेरकर पुन: अच्छी जुताई कर लें और घास-पात को पूर्णरूप से हटा दें। इसके बाद टमाटर की पौध को 60 *45 सेंमी. की दूरी लेते हुए रोपाई करें।
टमाटर की फसल में ध्यान रखने वाली बातें
- टमाटर की फसल के लिए काली दोमट मिट्टी, रेतीली दोमट मिट्टी और लाल दोमट मिट्टी में सफलतापूर्वक उगाई जा सकती है। वैसे टमाटर की खेती के लिए दोमट मिट्टी सबसे उत्तम मानी जाती है। हल्की मिट्टी में भी टमाटर की खेती अच्छी होती है।
- इसकी अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी का पीएच मान 7 से 8.5 होना चाहिए। क्योंकि इसमें मध्यम अम्लीय और लवणीय मिट्टी को सहन करने की क्षमता होती है।
- विभिन्न कीटों और मृदाजनित रोगों से बचाने के लिए बीज को 3 ग्राम थायरम या 3 ग्राम कार्बेन्डाजिम से उचारित करें।
- यदि आपने टमाटर की फसल गर्मियों के दिनों में लगाई हैं तो 6 से 7 दिनों के अंतर में सिंचाई करना चाहिए।
- यदि आप सर्दियों में टमाटर की फसल लें रहे हो तो 10-15 दिन के अंतर में सिंचाई करना पर्याप्त है।
- टमाटर की अच्छी पैदावार के लिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करना जरूरी है।

