सतपुड़ा की वादियों में अलख जगाती धारूल की अम्बा देवी, पांडवों ने की थी आराधना, चैत्र नवरात्र में हजारों भक्तों का तांता

By betultalk.com

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Chaitra Navratri 2026:- सतपुड़ा के सुंदर शादीयों और ऊंची पहाड़ी पर स्थित गुफ़ा में विराजमान स्वयंभू प्रगट मां अम्बा विराजमान हैं बैतूल रेलवे स्टेशन से 90 किलोमीटर और आठनेर मुख्यालय से पचास किलोमीटर दूर मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित आदिवासी अंचल के गांव धारूल में अम्बा माई का यह दिव्य दरबार है धारूल से दो किलोमीटर जंगल रास्ते से होते हुए अम्बा दरबार पहुचा जा सकता है। मान्यता है कि इस घने जंगल में स्थित गुफ़ा में मां अम्बा अनादी काल से विराजमान हैं। कहां जाता है कि पांच पांडवो ने अज्ञात वास के दौरान इसी गुफा में अम्बा देवी की आराधना की थी। इस प्राचीन शक्ति पीठ पर दर्जनों रहस्यमय गुफाएं हैं जो अलग-अलग दिशाओं में निकलती है जो आज भी रहस्यमय है। इस गुफ़ा में अनेक देवी-देवताओं की प्राचीन मुरतिया है। कहां जाता है कि आज भी जंगल में मां किसी ना किसी रूप में आकर भक्तों की रक्षा और दर्शन देती है इस दिव्य स्थान पर अनेकों साधू संतो ने तप किए।

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एक सच्ची घटना जो आज भी हर व्यक्ति के ज़ुबान से सुनी जाती है कहा जाता है आज से 25 वर्ष पुर्व आठनेर विकासखण्ड के गांव में रहने वाली गरीब मैयना बाई की आस्था और विश्वास मां अम्बा पर अटूट था प्रति अमावस्या और पूर्णिमा को वे पैदल पति के साथ दर्शन करने अम्बा देवी जाया करती कहा जाता है कि तब मां ने मैयना को दर्शन दिए मां के चमत्कारों की गाथाएं तपस्वी राधा बाई और मंगला बाई की जुबानी हजारों लोगों ने सुनी। इस स्थल से जुडे अनेकों चमत्कार हैं आज भी इस दिव्य दरबार में हर मनोकामना पूरी होती है कहा जाता है कि मां जिसे जब बुलाती है तब ही उसके दर्शन होते हैं चैत्र नवरात्र पर यहां महाराष्ट्र और बैतूल सहित एमपी के शहरों से हजारों लाखों लोग पहुंचकर दर्शन करते हैं। पहाड़ियों के बीज से होकर इस स्थल पर सुगमता से पहुंचा जा सकता है यहां पानी बिजली और रहने के लिए सराए कमरों की व्यवस्था है।

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