ताप्ती तटों पर गूंजे मां ताप्ती के जयकारे, हाथों में ध्वजाएं लेकर सतत आगे बढ़ रहे पदयात्री
Betul Daily News/मुलताई। मां ताप्ती परिक्रमा पदयात्रा 6 वें दिन बैतूल सीमा पर बसे ग्राम मोहटा पहुंची जहां पहले से ही प्रतिक्षारत ग्रामीणों ने पदयात्रियों का भव्य स्वागत किया। मोहटा में शाम ग्रामीणों ने घरों के सामने से कतारों में दीप जलाए घरों के सामने रोशनी की तथा आतिशबाजी करते हुए पुष्पवर्षा के साथ पदयात्रियों का स्वागत सत्कार किया। इस दौरान गांव में मां ताप्ती की शोभायात्रा निकाली गई जिसमें ग्रामीण पदयात्रियों के साथ शामिल हुए तथा जगह जगह मां ताप्ती का महिलाओं द्वारा पूजन कर पदयात्रियों पर पुष्पवर्षा की गई। ग्रामीणों ने बताया कि प्रतिवर्ष वे मां ताप्ती संपूर्ण परिक्रमा पदयात्रा का बेसब्री से इंतजार करते हैं। तथा पदयात्रा मोहटा पहुंचने पर भव्य स्वागत करते हुए पदयात्रियों की सेवा की जाती है। परिक्रमा पदयात्रा के पदयात्रियों द्वारा मोहटा में रात्री भोजन कर विश्राम किया गया जिसके बाद गुरूवार सुबह पदयात्रा आगे की ओर रवाना हुई।
प्रतिदिन मुलताई से पहुंच रहे ताप्ती भक्त
पदयात्रा जहां निरंतर आगे बढ़ती जा रही है वहीं मुलताई से प्रतिदिन बड़ी संख्या में ताप्ती भक्त पदयात्रा में शामिल हो रहे हैं जिससे पदयात्रियों का उत्साह वर्धन हो रहा है। मुलताई से पहुंचकर ताप्ती भक्तों द्वारा पदयात्रियों की आवश्यकताओं, स्वास्थ्य एवं जरूरत का सामान आदि का ध्यान रखा जा रहा है। बुधवार नगर से राजू पाटनकर, नरेन्द्र गिरी गोस्वामी, अक्षय सोनी, राजू सोलंकी, नीलू नागले, नितिन अग्रवाल, लोकेश, जगदीश चंद्र पंवार, नीरज चंदेल सहित बड़ी संख्या में ताप्ती भक्त मोहटा के लिए जारी पदयात्रा में शामिल हुए तथा पदयात्रियों का उत्साह बढ़ाया। राजू पाटनकर ने बताया कि कड़कड़ाती ठंड के बीच पदयात्रा करना कठिन होता है इसलिए पदयात्रियों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।

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80 वर्ष की उम्र में 2 हजार किलोमीटर पदयात्रा का संकल्प
पदयात्रियों में नगर के सुभाष वार्ड निवासी 80 वर्षीया कचरा बाई घाघरे भी शामिल है जिन्होने वयोवृद्ध होने के बावजूद 2 हजार किलोमीटर पैदल चलकर संपूर्ण परिक्रमा पदयात्रा करने का संकल्प लिया है। कचरा बाई का बढ़ती उम्र के बावजूद पदयात्रा में उत्साह देखने योग्य है। मां ताप्ती की ध्वजा लेकर जयकारे लगाते हुए वयोवृद्ध कचरा बाई अन्य पदयात्रियों का भी उत्साह वर्धन करते हुए चल रही है। कभी वे जयकारे लगाती हैं तो कभी वे मां ताप्ती के भजन गाती हैं। कड़कड़ाती ठंड में ताप्ती तटों के किनारे घने जंगलों के बीच कभी चढ़ाई तो कभी खाई पार करती हुई कचरा बाई अन्य ताप्ती भक्तों के लिए भी प्रेरणा स्त्रोत हैं। जब मोहटा में ताप्ती भक्त कचरा बाई से चर्चा करते हुए पूछा गया कि उम्र के इस मोड़ पर भी 2 हजार किलोमीटर की पदयात्रा का संकल्प और उत्साह के पीछे क्या वजह है तो उन्होंने बताया कि मां ताप्ती के प्रति अगाध श्रद्धा एवं आस्था के ही चलते उन्होने संपूर्ण पदयात्रा करने का संकल्प लिया है। उन्होने बताया कि मां ताप्ती के नाम से ही उन्हे संबल मिलता है। जीवन में मां ताप्ती का उद्गम से लेकर संगम तक विशाल रूप देखना उनका स्वप्न था जो परिक्रमा यात्रा के माध्यम से पूर्ण होने जा रहा है।

