नगर में पूरे क्षेत्र से मटर की भारी आवक, मुख्य मार्ग से लेकर गली गली तक बिक रही मटर

By betultalk.com

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200 रूपए से चालू हुई मटर 15 रूपए किलो पर पहुंची, मंडी में स्थिति और अधिक खराब

Betul Daily News/मुलताई। लगभग एक माह पहले 200 रूपए किलो से बाजार में बिकने आई मटर की स्थिति कुछ ही दिनों में 15 रूपए किलो तक पहुंच गई है। यह स्थिति क्षेत्र में मटर की अधिक पैदावार से हुई है जिससे स्थिति यह है कि साप्ताहिक बाजार, दैनिक बाजार के अलावा मटर की बिक्री मुख्य मार्ग सहित गली गली में हो रही है। इसके साथ ही पूरे क्षेत्र से सब्जी मंडी में भी मटर की भारी आवक होने से रेट की स्थिति और अधिक खराब है। बताया जा रहा है कि पहले जहां मटर 200 रूपए किलो बिकी वहीं एक सप्ताह बाद ही मटर 100 रूपए एवं बाद में 80 रूपए पहुंच गई। जिसके बाद लगातार रेट गिरने से मटर 50 रूपए प्रतिकिलो हो गया और अब एक माह बाद स्थिति यह है कि लगातार भाव गिरने से मटर 30 रूपए से 20 रूपए एवं अब 15 रूपए पर आ गई है जिससे किसानों द्वारा की गई मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। दरअसल मटर की फसल पूरी तरह अब आई है लेकिन तब तक मटर के भाव गिरकर घाटे का सौदा साबित हो रहे हैं। मटर के दिनों दिन गिरते भाव से यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है कि यही स्थिति रहेगी तो हालात क्या होंगे। वर्तमान में बाजार की स्थिति यह है कि हर जगह मटर ही मटर नजर आ रही है। बसस्टेंड से लेकर मुख्य मार्ग, स्टेशन मार्ग सहित अन्य मार्गों पर किसान मटर लेकर बैठे हुए हैं। साप्ताहिक बाजार एवं दैनिक बाजार में पहले से ही मटर की स्थिति खराब हो चुकी है। अब हालात यह हो चुके हैं कि किसान मटर लेकर गली गली बेचने निकल पड़े हैं ताकि भाड़ा लगाकर मुलताई लाई गई मटर का कम से कम भाड़ा ही निकल जाए।

मंडी में मटर की भारी आवक

इधर सब्जी मंडी में सुबह से ही बड़ी संख्या में पूरे क्षेत्र से किसान मटर लेकर पहुंच रहे हैं जिससे थोक में मटर के भाव गर्त में जा चुके हैं। किसानों की मजबूरी है कि गांव से नगर में लाई मटर को वापस ले जाना घाटे का सौदा है इसलिए जो दाम मिल रहे हैं किसान उस पर ही बेच रहे हैं ताकि उनका वजन हल्का हो सके। भारी लागत एवं मेहनत के बावजूद अधिक आवक से इस वर्ष मटर की स्थिति पिछली बार से ज्यादा खराब हो गई है। इसके बावजूद लगातार मटर की नगर में आवक बनी हुई है तथा अधिक आवक के कारण मटर की दुर्गति हो रही है।

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मटर का भी समर्थन मूल्य आवश्यक

अन्य फसलों की तरह हरी मटर का भी एक भाव तय होना जरूरी है ताकि उससे नीचे मटर नही बिक सके। किसान हर वर्ष मटर के लिए भारी लागत के साथ ही मेहनत भी करता है लेकिन जब कमाई का समय आता है तब मटर के भाव नीचे गिर जाते हैं जिससे किसान औने पौने दामों में मटर बेचने को मजबूर हो जाता है। फिलहाल यही स्थिति बनी हुई है जहां किसान को खेत से मटर बाजार में लाना जरूरी है तथा उसे किसी भी भाव में बेचना आवश्यक है अन्यथा लागत निकालने की भी मुश्किल हो जाएगी। इस वर्ष जनवरी मध्य में मटर की भारी आवक से लगतार है कि फिर किसानों को भाव के लिए परेशान होना पड़ेगा।

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