Betul Ki Taja Khabar/मुलताई। विद्युत वितरण कंपनी की भूमि के नामांतरण में तहसीलदार पर गलत प्रक्रिया अपनाकर नामांतरण करने के आरोप पूर्व जिला पंचायत सदस्य हरिराम नागले ने लगाए हैं l शिकायतकर्ता हरिराम नागले ने एस डी एम को की गई शिकायत में बताया कि तहसीलदार संजय बरैया द्वारा गलत तरीक़े से विद्युत वितरण कंपनी के पक्ष में नामांतरण किया जा रहा है l उन्होंने कहा कि तहसीलदार द्वारा और भी मामलो में गड़बड़ी की शिकायत प्राप्त हुई है l उन्होंने एसडीएम से मांग की है कि तहसीलदार पर उचित कार्रवाई की जाए। पूरे मामले के संबंध मे मनोज अग्रवाल ने बताया कि उसके पूर्वजो ने वर्ष 1958 में 3 एकड़ भूमि क्रय कर उसमें से 8000 वर्ग फीट भूमि का डायवर्सन कराकर ऑयल मिल स्थापित की थी, जो 1962 में संसाधनों के अभाव में बंद हो गई थी। इस आयल मिल पर विद्युत विभाग का 29000 रुपए ऊर्जा प्रभार बकाया रह गया था, जिसकी वसूली विद्युत विभाग द्वारा न्यायालय के माध्यम से 40000 में ऑयल मिल नीलामी में स्वयं खरीद कर बकाया बिल की राशि समायोजित कर ली थी।
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इस भूमि का एक वाद जेएमएफसी न्यायालय मुलताई में चल रहा था जिसमें आदेश दिनांक 27 सितंबर 2025 को विद्युत कंपनी के पक्ष में डिक्री पारित हुई है जिसकी अपील शिकायतकर्ता द्वारा सक्षम न्यायालय में कर दी गई है। बावजूद इसके विद्युत कंपनी मुलताई के उप महाप्रबंधक हितेश वशिष्ठ द्वारा डिक्री को बैनामा बताकर भूमि नामांतरण का आवेदन मय शपथ पत्र के तहसीलदार मुलताई के समक्ष प्रस्तुत किया है मनोज अग्रवाल ने कहा कि तहसीलदार द्वारा आवेदन को ना केवल स्वीकार किया गया, बल्कि व्यवहार न्यायालय से पारित डिक्री के पंजीयन हेतु जिला पंजीयक को पत्र जारी किया गया। नियमानुसार न्यायालय से पारित डिक्री को निष्पादन याचिका के माध्यम से वादी द्वारा पंजीयन आदेश प्राप्त करना था। बिना पंजीयन आदेश के तहसीलदार द्वारा डिक्री के आधार पर नामांतरण आवेदन स्वीकार करना नियमों की उपेक्षा है, वही उपमहाप्रबंधक द्वारा डिक्री को बैनामा बताकर उसके समर्थन में शपथ पत्र देना गंभीर अपराध है।
इनका कहना है
विद्युत वितरण कंपनी द्वारा नामांतरण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया है अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है
संजय बरैया तहसीलदार मुलताई

