ग्रामीणों की उपस्थिति में आस्था और परम्परा का अद्भुत संगम
Betul Ki Taja Khabar/मुलताई। प्रभात पट्टन ब्लाक के ग्राम बिसनूर में स्थित विट्ठल रुक्मिणी मंदिर प्रांगण में कुरूसना अवधूत बाबा का स्थल इन दिनों श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां भक्तों द्वारा बाबा के 60 फीट ऊंचे खंभों पर ध्वज चढ़ाने की परंपरा अनवरत कई वर्षों से चली आ रही है, जो न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि ग्रामीण संस्कृति की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करती है। अवधूत बाबा के खंभों पर ध्वज चढ़ाने और पूजन के लिए आसपास के गांव बल्होरा , जामठी सवासन , गरव्हा, पचधार , नांदकुड़ी, काजली एवं गौना से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भक्तों ने खप्पर में कपूर जलाकर ध्वज का पूजन किया तथा मन्नत मांगी ।रूकेश साहू की ओर से अवधूत बाबा के खंभों पर ध्वजा चढ़ाया गया। सुनील साहू ने बताया कि खप्पर में जब तक कपूर जलते रहता है , तब तक ध्वजा चढ़ाने वाला भक्त नीचे नहीं उतरता है, तभी उसकी मनोकामना पूर्ण होती है।
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ध्वज चढ़ाना केवल धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि यह आस्था, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। माना जाता है की ध्वजा चढ़ाने से परिवार में सुख शांति बनी रहती है, नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है और गांव में सुख समृद्धि और खुशहाली आती है । ग्रामीण शेषराव बारस्कर ने बताया अवधूत बाबा के खंभों पर ध्वजा चढ़ाने की परंपरा आज भी जीवंत है और लोगों की गहरी आस्था का प्रमाण है। यह परंपरा न केवल धार्मिक विश्वास को मजबूत करती है, बल्कि ग्रामीण जीवन की सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित करती है। भक्तों ने बताया कि नव संवत्सर गुड़ी पड़वा और कार्तिक पूर्णिमा को वर्ष में दो बार चढ़ने की परंपरा रही है। भक्त मंडली द्वारा प्रस्तुत भजनों ने वातावरण भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम के अंत में प्रसादी वितरण किया गया। धार्मिक आयोजनों की शुरुआत भी अक्सर ध्वज स्थापना से होती है जो शुभता और मंगल का संकेत मानी जाती है।

