BETUL NEWS/भैंसदेही/मनीष राठौर:- भैंसदेही जनपद पंचायत कार्यालय से बड़ी खबर सामने आई है। ग्राम पंचायत खामला के सरपंच संजू अंखड़े और सचिव पर पंचों व ग्रामीणों ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। मुख्य आरोप अनधिकृत रूप से सरकारी राशि का आहरण करने का है। जनपद पंचायत के सीईओ रितेश चौहान ने इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच के लिए 6 सदस्यीय विशेष टीम गठित की है। यह टीम जिला पंचायत बैतूल के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के निर्देशानुसार कार्य कर रही है।6 सदस्यीय जांच टीम का गठन: सदस्य और जिम्मेदारियांटीम में निम्नलिखित अधिकारी शामिल हैं, जिन्हें विशिष्ट भूमिकाएं सौंपी गई हैं:सहायक यंत्री (भैंसदेही जनपद): निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और व्यय की जांच।अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी: पंचायत योजनाओं में अनियमितताओं का मूल्यांकन।खंड पंचायत अधिकारी: ग्रामीण शिकायतों का सत्यापन।कैलाश वास्केल, उपयंत्री: तकनीकी पहलुओं और राशि आहरण की जांच।ब्लॉक समन्वयक एसबीएम: स्वच्छ भारत मिशन से जुड़ी शिकायतों की पड़ताल।
ब्लॉक समन्वयक प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण): आवास योजना में भ्रष्टाचार की जांच।यह टीम ग्राम पंचायत खामला की प्राप्त सभी शिकायतों—जैसे निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का उपयोग, फर्जी बिलिंग और अनधिकृत भुगतान—की विस्तृत जांच करेगी। जांच रिपोर्ट जल्द ही उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी।जांच की शुरुआत: आज टीम खामला पंचायत पहुंचीआज 22 जनवरी 2026 को जांच दल ग्राम पंचायत खामला पहुंचा। टीम ने सरपंच-सचिव के कार्यालय के दस्तावेजों का अवलोकन किया, ग्रामीणों से बयान दर्ज किए और निर्माण स्थलों का निरीक्षण शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच ने विभिन्न योजनाओं की राशि का दुरुपयोग किया, जिससे पंचायत का विकास ठप हो गया।
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पूर्व भ्रष्टाचार की जांच के लिए जिला पंचायत ने पहले ही अंतिम नोटिस जारी कर चुकी है।सीएम का सम्मान और अब भ्रष्टाचार का कलंकसबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मात्र आठ महीने पहले, 16 मई 2025 को भोपाल में एक प्रमुख चैनल के कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वयं सरपंच संजू अंखड़े को ‘बेहतर कार्यों’ के लिए सम्मानित किया था। सम्मान समारोह में सरपंच को पंचायत के उत्कृष्ट प्रबंधन के लिए पुरस्कार मिला था। लेकिन अब उसी सरपंच पर ग्रामीणों ने राशि गबन, फर्जी काम दिखाने और योजनाओं में भेदभाव के आरोप लगाए हैं। यह मामला जिला प्रशासन के लिए शर्मिंदगी का कारण बन गया है।जांच के परिणाम आने तक सरपंच के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है, लेकिन ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ रहा है। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि दोषी को सजा मिलेगी।

