मुलताई क्षेत्र में 43 दिनों में 94 स्थानों पर लगी आग, लाखों की क्षति, प्रतिवर्ष बढ़ रहे आंकड़े
Betul News/मुलताई। मुलताई क्षेत्र में 1 मार्च से 12 अप्रैल तक कुल 43 दिनों में 94 स्थानों पर आग की घटनाएं हुई है जिसमें लाखों का नुकसान हुआ है। कहीं खड़ी फसल जल गई तो कहीं कच्चे मकान खाक हो गए तथा कहीं तो खलियानों में काट कर रखी फसल भी आग की भेंट चढ़ गई। प्रतिवर्ष ग्रीष्मकाल में फसल पकते ही किसानों को आग का भय सताने लगता है तथा तमाम सुरक्षा के प्रबंध करने के बावजूद हर वर्ष आग लगने की घटनाएं बढ़ती ही जा रही है जिससे कई किसान पूरी मेहनत एवं पैसा लगाने के बावजूद आग के कारण ठगे से रह जाते हैं तथा इसका खामियाजा पूरे वर्ष भर चुकाते रहते हैं। फसल को रात दिन खून पसीने से सींचने वाले किसान फसल का फायदा उठाने के समय हमेशा तनाव में रहते हैं कि कहीं आग लगने से उनकी पूरी मेहनत एवं लागत पर पानी ना फिर जाए। इसमें सक्षम किसान तो कुछ हद तक क्षति वहन कर लेते हैं लेकिन फसल पर निर्भर मध्यम एवं निर्धन किसान तो मानों पूरी तरह बरबाद हो जाते हैं। अपनी पूरी उर्जा एवं रकम लगाकर तथा उधारी करके फसल पालने वाले किसानों के लिए इसकी कोई गारंटी नही है कि फसल पकने के बाद सहीं सलामत बिक्री स्थल तक पहुंच पाएगी इसके लिए जहां एक तरफ फसल के समय रत जगा किया जाता है वहीं फसल पकने के बाद भी यह रतजगा चालू रहता है जब तक की फसल बोरों में भरकर कृषि मंडी अथवा व्यापारी के पास तक नही पहुंच जाती। इसमें कभी कभी फसल में आग लगाकर रंजिश भी शामिल रहती है तो कभी शार्ट सर्किट तो कभी हल्की सी गलती जिसकी भारी कीमत किसान को चुकाना पड़ता है।
शार्ट सर्किट से अधिकांश होती है आग की घटनाएं
खेत में खड़ी फसल में आग अधिकांश उपर से जाने वाले बिजली के तारों से लगती है। गर्मी में शार्ट सर्किट अधिक होते हैं जिसका सीधा प्रभाव पकी हुई फसल पर पड़ता है और देखते ही देखते पूरी फसल कुछ समय में स्वाहा हो जाती है। किसानों के पास इतने भी संसाधन नही होते कि फायर ब्रिगेड के पहुंचने तक आग को किसी भी तरह काबू कर सकें। हालांकि अधिकांश मामलों में फायर ब्रिगेड द्वारा आग पर काबू पाया जाता है लेकिन दूर दराज क्षेत्र में फायर ब्रिगेड पहुंचने में समय लगता है और कई बार तो फायर ब्रिगेड पहुंचने के बावजूद आग लगने वाले स्थान पर पहुंचने में नाकाम रहती है। पूरे मामले में यदि शार्ट सर्किट ना हो ऐसा प्रबंध कर लिया जाए तो लगभग 70 प्रतिशत आग लगने की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है।
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एक साथ विभिन्न स्थानों पर आग लगने से नहीं पहुंच पाती दमकल
फायर ब्रिगेड के कर्मचारी सुमीत पुरी, गिरीश पिपले, भूपेन्द्र राठौर, धनराज पंवार, राहुल चंडालिया, दीपक अहिरवार, मनोज सिंह आदि ने बताया कि ग्रीष्मकाल में चौबिसों घंटे मुस्तैद रहना पड़ता है क्योंकि आग लगने का कोई समय नहीं होता इसलिए सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर रवाना होना पड़ता है। उन्होने बताया कि मुलताई क्षेत्र के तहत प्रभात पट्टन, मासोद, गौनापुर चौकी तक, खेड़ली बाजार, दुनावा, साईंखेड़ा आदि क्षेत्रों में जाना पड़ता है लेकिन उस समय स्थिति अत्याधिक खराब हो जाती है जब दो विपरित क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं होती है। ऐसे समय किसी भी एक जगह पर जाया जा सकता है। कर्मचारियों ने बताया कि कभी कभी तो एक आग बुझा रहे होते हैं उसी समय दूसरी जगह आग की सूचना मिलती है तो तत्काल उस स्थल के लिए निकलना पड़ता है जिसमें पूरी सतर्कता एवं सुरक्षा के साथ आग पर काबू किया जाता है ताकि आसपास के खेत बच सकें।
प्रतिवर्ष गेंहू एवं गन्ने की फसल होती है प्रभावित
क्षेत्र में मार्च माह में गेंहू एवं गन्ने की फसल पकती है तथा गर्मी बढ़ने से इसी समय आग लगने की घटनाएं भी होने लगती है। हल्की सी चिंगारी अथवा तारों का टकराना किसी भी खेत की पूरी फसल खाक करने के लिए पर्याप्त है। ऐसी स्थिति में कई बार फसल कटने के बाद भी आग लगने से किसानों को भूसा आदि जल जाता है। इधर लगातार आग की घटनाओं के बावजूद किसान पलारी जलाने से नही चूकते जो भी आग लगने का मुख्य कारण हैं। किसानों ने बताया कि गर्मी में फसल कटने के बाद अधिकांश किसान पलारी जलाते हैं जो कई बार भड़क जाती है जिससे आसपास के किसानों के खेत में खड़ी फसल इसकी चपेट में आ जाती है। हालांकि शासन प्रशासन द्वारा पलारी जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है इसके बावजूद चोरी छिपे कई किसान पलारी जलाने से नही चूकते जिसका खामियाजा दूसरे किसानों को भरना पड़ता है। कुल मिलाकर खड़ी फसल में आग लगने से रोकने के लिए कोई व्यवस्थित प्रबंध नही होने से हर वर्ष किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठाना पड़ता है।

