Betul News Today/भीमपुर/मनीष राठौर:- भीमपुर विकासखंड के पिपरियाढाना, पलस्या और रातामाटी गांवों में उपस्वास्थ्य केंद्र शोपीस बनेलाखों रुपये की लागत से बने सामुदायिक उपस्वास्थ्य केंद्र आज तालों से बंद पड़े हैं। इन पर जर्जर दीवारें, खराब झाड़ियां और गंदगी फैली हुई है। डॉक्टर, नर्स या कोई कर्मचारी नहीं होने से ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हैं। गर्भवती महिलाएं, बच्चे और बुजुर्गों को 30-35 किमी दूर भीमपुर/भैंसदेही या 50-55 किमी दूर जिला अस्पताल जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों खर्च हो रहे हैं।सरकारी दावों के बावजूद बुनियादी सुविधाओं की कमीप्रदेश और केंद्र सरकार के स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के दावों के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में चुनौतियां बरकरार हैं। इन केंद्रों में दवाइयां, टीकाकरण जैसी सेवाएं उपलब्ध नहीं। ग्रामीण झोलाछाप चिकित्सकों के जाल में फंस रहे हैं, जो उनकी जान जोखिम में डालते हैं।कर्मचारियों की लापरवाही से ग्रामीण परेशानग्रामीणों का कहना है कि केंद्र बनने पर गांव में ही इलाज की उम्मीद जगी थी, लेकिन स्टाफ की मनमानी ने सब बर्बाद कर दिया। पहले कभी-कभार आने वाले कर्मचारी अब गायब हैं। एक ग्रामीण ने बताया, “गर्भवती महिलाओं को रात में दर्द होने पर भटकना पड़ता है।
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यहां पदस्थ स्टाफ कौन है, इसकी जानकारी भी नहीं।” गरीब मजदूरों के लिए 35 किमी दूर बैतूल जाना असंभव है।हर गांव में झोलाछाप डॉक्टरों का राजग्राम धामनिया, चांदु, रातामाटी, चोहटा आदि में वर्षों से झोलाछाप डॉक्टर तैनात हैं। ये महंगे इंजेक्शन देकर ग्रामीणों को लूटते हैं। पलस्या में हमेशा ताला लटका रहता है।दूरियां घातक साबित हो रही, समय पर इलाज न मिलने से हादसेटूटी सड़कों वाले इन दूरस्थ गांवों में छोटी बीमारियों के लिए भी लंबी यात्रा करनी पड़ती है। डिलीवरी, बुखार या चोट में देरी से हालत बिगड़ जाती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से स्टाफ तैनाती और नियमित संचालन की मांग की है।प्रशासनिक उदासीनता पर सवालस्वास्थ्य अधिकारियों से संपर्क करने पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। यह बदहाल स्थिति सरकारी योजनाओं पर सवाल खड़ी करती है और ग्रामीणों के भविष्य को खतरे में डाल रही है।

