Holi Ke Rang: जानिए होली पर किस रंग का क्या होता है महत्व

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Holi Ke Rang:- हिंदू धर्म में होली का त्योहार बड़ा विशेष माना जाता है. हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि के दिन होलिका दहन का त्योहार मनाने के बाद अगले दिन रंगों के साथ होली खेली जाती है. इस साल 03 मार्च को फाल्गुन माह की पूर्णिमा पर होलिका दहन किया जाएगा. इसके बाद 04 मार्च को रंगों का त्योहार मनाया जाएगा. कुछ लोग होलिका की राख से भी होली खेलते हैं. ब्रज में अलग-अलग तरीके से होली खेली जाती है.

इसमें लड्डूमार होली, लट्ठमार होली, फूलों वाली होली और छड़ीमार होली शामिल है, लेकिन होली का मुख्य आकर्षण रंग ही होते हैं. होली के दिन लोग एक दूसरे पर लाल, पीला, हरा, नीला, सफेद और चमकीले रंग लगाकर ये त्योहार मनाते हैं. होली पर रंग, गुलाल खेलने के कई कारण हैं और इसके लाभ भी बताए जाते हैं.

ज्योतिष और धर्म शास्त्रों के अनुसार…

ज्योतिष और धर्म शास्त्रों के अनुसार, होलाष्टक से लेकर होलिका दहन तक की अवधि शुभ नहीं मानी जाती है. मान्यता है की इस दौरान सभी ग्रह उग्र स्थिति में रहते हैं. पंडितों और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, रंगों का अलग-अलग ग्रहों से संबंध होता है. होली के दिन अलग-अलग रंगों का उपयोग करने से ग्रहों की प्रतिकूलता और नकारात्मकता दूर होती है. मान्यता है कि होली के रंग व्यक्ति के अंदर ऊर्जा और उत्साह का संचार करते हैं. प्राकृतिक रंग रोगों से रक्षा करते हैं. इससे आरोग्य भी प्राप्त होता है.

अलग-अलग रंगों का महत्व

हरा रंग- ज्योतिष के अनुसार, हरा रंग बुध ग्रह से जुड़ा मना जाता है. यह रंग विकास, समृद्धि, संतुलन और शांति का प्रतीक माना जाता है.

पीला रंग- यह रंग गुरु ग्रह से जुड़ा माना जाता है. ये रंग ज्ञान, पवित्रता, ऊर्जा और खुशी का प्रतीक माना जाता है. इससे गुरु का शुभ प्रभाव बढ़ता है.

लाल रंग- लाल रंग मंगल ग्रह से जुड़ा है. ये रंग ऊर्जा, शक्ति और साहस का प्रतीक है.

गुलाबी रंग- गुलाबी रंग का संबंध शुक्र से बताया गया है. ये रंग प्रेम, कोमलता, शांति और स्नेह का प्रतीक है.

नारंगी रंग– नारंगी रंग सूर्य ग्रह से जुड़ा है. यह ऊर्जा, उत्साह, खुशी का प्रतीक है.

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