Sheetala Ashtami 2026:- आज शीतला अष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है। यह त्योहार हर साल चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन देवी शीतला की पूजा विधि-विधान से की जाती है। उन्हें बासी खाना चढ़ाया जाता है। क्योंकि प्रसाद सातवें दिन ही तैयार किया जाता है, इसलिए धार्मिक मान्यता है कि इस दिन देवी की पूजा करने से फैलने वाली बीमारियों से राहत मिलती है।
सनातन धर्म में बताया गया है कि हर देवी-देवताओं की अपनी अलग-अलग सवारियां हैं. कोई देवी शेर पर सवार होती हैं, तो कोई उल्लू या हाथी पर. इसी तरह माता शीतला गधे पर सवार होती हैं. गधा आमतौर पर मेहनती और सीधा-सादा जानवर माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि माता शीतला गधे पर ही क्यों सवार होती हैं? अगर नहीं तो आइए जानते हैं कि गधा माता की सवारी कैसे बन गया?
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स्कंद पुराण के अनुसार…
सनातन धर्म में माता शीतला को बीमारियों को दूर करने वाली देवी माना गया है. विशेषकर चेचक और अन्य त्वचा के रोगों से बचने के लिए उनकी पूजा की जाती है. स्कंद पुराण के अनुसार, माता शीतला की सवारी गधा है. माता अपने हाथों में कलश, सूप और झाड़ू धारण करती हैं. इसके साथ ही वो नीम के पत्तों की माला भी धारण करती हैं.लोगों के मन में ये सवाल आता है कि माता ने गधे को ही क्यों अपनी सवारी के लिए चुना?
शीतला माता की सवारी गधा ही क्यों?
दरअसल, गधा एक बहुत ही मेहनती और सनहशील जानवर है. गधे की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी जबरदस्त मानी जाती है. यानी जल्दी उसको कोई बीमारी नहीं होती. माता शीतला भी बीमारियों को दूर करती हैं. यही कारण है माता ने अपनी सवारी के लिए गधे को चुना. गधा हमें सिखाता है कि धैर्य और सहनशीलता से हर परेशानी से पार पाया जा सकता है.

