आत्मा का परमात्मा से मिलन ही महारास है : राजेन्द्र कृष्ण शरण जी

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Betul Samachar/चिचोली :- जब तक मनुष्य अपने पुरुष या स्त्रीत्व के अहंकार मे डुबा रहेगा तब तक व देह भाव से ऊपर नही उठ सकता और जिस व्यक्ति को देह की सुध है वो महारास मे प्रवेश कर ही नही सकता। महारास मे प्रवेश सिर्फ उसी को मिलता है जो श्रीजी का कृपापात्र होगा। महारास कामयुक्त लीला नही अपितु काममुक्त लीला है, आत्मा का परमात्मा से मिलन ही महारास है उक्त वचन खाक चौक आश्रम मण्डाई घाट मे चल रही श्रीमद् भागवत कथा के षष्टम दिवस सुप्रसिद्ध कथाव्यास पं. राजेन्द्र कृष्ण शरण जी महाराज ने कहे। महाराज श्री ने कथा के दौरान वरुण लोक की लीला, कंस वध, उद्धव गोपी संवाद, गोपी गीत व श्रीकृष्ण रुकमणी विवाह के सुंदर प्रसंग सुनाए। विवाह के अवसर पर पांडाल मे भक्त झुम उठे व नृत्य करते हुए भगवान की बारात का आनंद लिया। कथा आयोजको ने बताया की 01 मार्च को कथा विश्राम होगी और पुर्णाहुति के बाद भंडारे का आयोजन रहेगा जिसमे आसपास के भगवद भक्त सम्मिलित होगे।

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