Betul News Today/मुलताई। शासकीय महाविद्यालय में नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा के अंतर्गत एक संगोष्ठी एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. सरिया ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए महिला सशक्तिकरण, राजनीतिक भागीदारी और संवैधानिक मूल्यों के महत्व पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी सतत विकास, आर्थिक समृद्धि, सामाजिक समानता और समावेशी निर्णय प्रक्रिया के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर डॉ. ममता राजपूत ने विधायिका में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण के विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि यह कदम महिलाओं की निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाकर लोकतंत्र को और सशक्त बनाएगा।
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संगोष्ठी के दौरान आपातकाल में संविधान हत्या विषय पर भी वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। महिला सशक्तिकरण विषय पर वरिष्ठ प्राध्यापिका प्रो. तारा बारस्कर, प्रो. प्रियांक भोपते एवं प्रो. अंजलि सौदागर ने कहा कि महिलाओं की शिक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक जागरूकता ही सशक्तिकरण की आधारशिला है। उन्होंने छात्राओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर प्रो. उमेश सलवंशी, डॉ. विनय कुमार राठौड़, डॉ. सिद्धार्थ पंडोले, प्रो. कृष्णा नरवरे सहित प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को सामाजिक सरोकारों एवं संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया गया।

