मुख्य रेलवे ट्रैक पर स्थित होने के बावजूद शासन प्रशासन की लापरवाही से नहीं पहुंच पाते तीर्थयात्री और पर्यटक
Betul Ki Khabar/मुलताई। पुण्य सलिला मां ताप्ती के उदगम स्थल ताप्ती तट को पूर्णतः प्रदूषण मुक्त करके इसके तटों का सौंदर्यीकरण एवं मंदिरों को संरक्षण की आवश्यकता है। तापी मैया का जल वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण है जिसके जल का आचमन, पान, और स्पर्श मात्र ही संकटों का हरण करने होता है लेकिन वर्तमान में स्थिति सही नहीं हैं क्योंकि एक ओर जहां ताप्ती सरोवर में गंदगी समाहित होने का सिलसिला जारी है वहीं प्राचीन मंदिरों को भी संरक्षण को आवश्यकता है। यह पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है ताकि मां ताप्ती का पौराणिक, ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व से लोग मुलताई पहुंचकर अवगत हो सके । इसके लिए ताप्ती भक्तों और सेवकों द्वारा शासन प्रशासन से लंबे समय से गुहार लगाई जा रही है। उम्मीद है शासन प्रशासन इस ओर ध्यान देकर मुलताई स्थित ताप्ती तट की सुधि लेते हुए इसे नया आयाम प्रदान करेंगे।
मंदिरों का धार्मिक के साथ ऐतिहासिक महत्व
ताप्ती मैया की सेवा में समर्पित पुजारी सौरभ जोशी ने बताया कि तापी मैया के उद्गम मूलतापी में स्थापित तापी मैया के चार मंदिरों की वर्तमान स्थिति के बारे में जानना बहुत दिलचस्प है, जिनमें से प्रत्येक का अपना एक विशेष इतिहास और महत्व है। उन्होंने बताया कि मुलताई का यह सौभाग्य है कि मां ताप्ती का इसे वरदान मिला है जहां धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व रखने वाले विभिन्न मंदिर प्राचीन काल से स्थित है। पर्यटन की दृष्टि से रेलवे की मेन लाइन पर स्थित होने से यहां पर्यटन की भी अपार संभावनाएं हैं। इसलिए तीर्थ यात्रियों एवं पर्यटकों का ध्यान खींचने के लिए यहां जरूरत है इस क्षेत्र को सुव्यवस्थित विकसित करने की ताकि अधिक से अधिक लोग आकर मां ताप्ती के महत्व को जान सकें।
मां ताप्ती की स्वयं भू प्रकार हुई पाषाण प्रतिमा
ताप्ती तट पर सूर्य कुंड के सामने स्थित प्राचीन ताप्ती मंदिर पत्थर से निर्मित है। यहां स्थित मां ताप्ती की प्रतिमा स्वयं भू तापी सरोवर में प्रकट हुई है। इसका इतिहास लगभग पांच से सात सदियों पुराना है। मां ताप्ती का नवीन मंदिर सरोवर के जल में होने के बावजूद ठोस जगह पर है। इसकी स्थापना संवत 1991 में वज्ररानी देवी मालगुजार से चुन्नीलाल जी भार्गव की पत्नी जिनको जोशी परिवार के प्रहलाद राव भट्ट जोशी द्वारा तापी जल के घट का प्रयोग बताया था और संकल्पित किया था । उसी परिवार के शेषराव जोशी एंव दत्तात्रेय जोशी के द्वारा स्थापित भार्गव परिवार द्वारा पुत्र प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होने पर की गई थी l
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नारद टेकड़ी और बिंदु पर्वत है तप स्थली
पवित्र नगरी में स्टेशन के उस पार स्थित नारद टेकड़ी नामक नारद तपस्थली है जहां एक कुंड में जल स्रोत है। तप स्थली होने से यह जन आस्था का केंद्र रहा है इसलिए स्थानीय लोगों द्वारा 40 वर्ष पूर्व एक छोटी मूर्ति स्थापित की गई थी। इसके आगे बिंदु पर्वत पर मंदिर स्थित है जो मंदिर नारद टेकड़ी के कुछ एक कदम आगे एक ऊंचे पर्वत पर है, जिसे बिंदु पर्वत के रूप में जाना जाता है। इसकी स्थापना लगभग 7 वर्ष पूर्व की गई थी। सूरत रामनगर के प्रख्यात संत श्री बापजी महाराज के द्वारा इस जगह का शोध कर यहां पर पाषाण की मूर्ति स्थापित करवाई गई। तापी मैया और मंदिरों की वर्तमान स्थिति को देखकर यह स्पष्ट है कि तापी मैया का जल वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण है सिर्फ शासन प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है।

