Weather News Today:- अप्रैल से पहले मार्च में ही गर्मी ने मध्य प्रदेश के लोगों का जीना मुहाल करना शुरू कर दिया है। जैसे-जैसे मार्च का महीना आगे बढ़ रहा है, तापमान बढ़ता जा रहा है। बुधवार (11 मार्च 2026) को दिन के औसत तापमान में 3 से 5 °C और रात के तापमान में 2 से 3 °C की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कई जिलों में तापमान 38-39 °C को पार कर गया। सबसे ज़्यादा तापमान 40 °C रतलाम में दर्ज किया गया। अगले 24 घंटों के दौरान राज्य में मौसम सूखा रहेगा, लेकिन आने वाले दिनों में तापमान में फिर से बदलाव देखा जा सकता है।
बुधवार को तापमान कितना था?
- नर्मदापुरम में 39.9°C
- धार में 39.4°C
- गुना में 38.1°C
- इंदौर में 38°C
- खजुराहो में 38.2°C
- टीकमगढ़ में 38.4°C
- ग्वालियर में 37.7°C
- उज्जैन में 37.7°C
- दमोह में 37.8°C
- मंडला में 37.5°C
- सागर में 37.4°C
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14 मार्च को सक्रिय होगा नया सिस्टम
मौसम विज्ञान केन्द्र, भोपाल की दैनिक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ, चक्रवाती परिसंचरण और एक ट्रफ विस्तृत है। उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर समुद्र तल से 12.6 किमी ऊंचाई पर लगभग 167 किमी/घंटा की गति से पश्चिमी जेट स्ट्रीम हवाएं बह रही हैं। एक नया पश्चिमी विक्षोभ 14 मार्च 2026 से उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करेगा। इसके असर से पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में कहीं-कहीं बादल छाने और बूंदाबांदी हो सकती है। वहीं तापमान में भी 2 से 4 °C की गिरावट आ सकती है लेकिन मार्च अंत में तापमान के 40 °C के पार पहुंचने की संभावना जताई गई है।
अप्रैल में पड़ेगी भीषण गर्मी
अप्रैल-मई में पारा 42 से 45 °C तक पहुंचने का अनुमान है। ग्वालियर-चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों में पारा 45 °C के पार जा सकता है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में भी भीषण गर्मी का असर देखने को मिलेगा। नीमच, मंदसौर, विदिशा, सागर, सीधी, सिंगरौली में तापमान बढ़ा रहेगा। अप्रैल-मई में हीट वेव का असर रहेगा। बुंदेलखंड और पूर्वी मध्यप्रदेश (विंध्य क्षेत्र) में हीट वेव चलने की आशंका है।
किसानों को विशेष सलाह
- बढ़ती गर्मी के बीच मौसम विभाग ने किसानों को भी विशेष सलाह दी है। मौसम विभाग ने कहा है कि गेहूं की फसल में दाना भरने की अवस्था के दौरान समय पर सिंचाई करके मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखें। फसलों की नियमित निगरानी करें और कीट व रोग दिखाई देने पर आवश्यक नियंत्रण उपाय अपनाएं।
- पक चुकी सरसों और प्रारंभिक रबी फसलों की समय पर कटाई करें ताकि दाने झड़ने से होने वाले नुकसान से बचा जा सके। जहां सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो, वहां ग्रीष्मकालीन फसलें जैसे मूंग और उड़द की बुवाई जारी रखें।
- टमाटर, मिर्च और बैंगन जैसी सब्जियों में नियमित सिंचाई और पोषक तत्व प्रबंधन सुनिश्चित करें। रस चूसने वाले कीटों और फल छेदक कीटों की निगरानी करें तथा अनुशंसित पौध संरक्षण उपाय अपनाकर उनका नियंत्रण करें।
- बागों में फूल आने और प्रारंभिक फल बनने की अवस्था में पाउडरी मिल्ड्यू, हॉपर तथा अन्य कीटों की निगरानी करें। स्वस्थ फल विकास के लिए उचित सिंचाई और पोषक तत्व प्रबंधन बनाए रखें।

