गिनती की पंचायतों में करोड़ों के बिलों का भुगतान: खेल समझें तो खुलासा होगा भंडाफोड़
जनपद पंचायत भीमपुर में मिलीभगत से चलता बिलों का खेल
चाँदू सेक्टर में ‘कागजी काम’ का खेल? 5 करोड़ के भुगतान पर उठे सवाल एक ही वेंडर को करोड़ों का भुगतान, जमीनी हकीकत पर संदेह
BETUL NEWS/भैंसदेही/मनीष राठौर:- भैंसदेही विधानसभा क्षेत्र की भीमपुर तहसील के अंतर्गत जनपद पंचायत भीमपुर की चाँदू सेक्टर की ग्राम पंचायतों में शासकीय योजनाओं के नाम पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। दस्तावेजों के आधार पर एक ही वेंडर को विभिन्न पंचायतों से करोड़ों रुपये का भुगतान किए जाने का खुलासा हुआ है, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों ने आरोप लगाया है कि यह सब कागजी कारनामों और मिलीभगत का नतीजा है।
श्री जी ट्रेडर्स को हुआ मोटा भुगतान
प्राप्त दस्तावेजों में दर्ज जानकारी के मुताबिक, फर्म का नाम श्री जी ट्रेडर्स (स्थान: जामुठाना ढोकया, जिला बैतूल; GSTIN: 23DJMPB5302J1ZI; मोबाइल: 9617904875) को जनपद पंचायत भीमपुर के चाँदू सेक्टर की चार ग्राम पंचायतों से भारी राशि का भुगतान किया गया है। केवल मनरेगा योजना के तहत ही इस वेंडर को ढोकया पंचायत से ₹35.41 लाख, रंभा से ₹70.89 लाख, पल्सया से ₹49.04 लाख और चाँदू से ₹28.74 लाख का भुगतान हुआ है, जो कुल ₹1.84 करोड़ बनता है।
इसके अलावा, लगभग 100 बिलों के जरिए ₹1.05 करोड़ से ₹1.15 करोड़ की अतिरिक्त राशि का भुगतान भी दर्ज है। कुल मिलाकर अब तक ₹3 करोड़ से अधिक का भुगतान हो चुका है। 15वें वित्त आयोग के तहत संभावित ₹1.5 करोड़ की राशि जोड़ें तो यह आंकड़ा आसानी से ₹5 करोड़ तक पहुंच जाता है। बैंक विवरण में CBI बैतूल, खाता संख्या 5639759932, IFSC: CBIN0281539 (मुरली बडौदे) का उल्लेख है।

जमीनी हकीकत पर बड़ा सवाल
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वेंडर के नाम पर न तो कोई स्पष्ट दुकान या गोदाम है और न ही पर्याप्त मशीनरी या संसाधन दिखाई देते हैं। मुरली बडौदे क्षेत्र में इतनी बड़ी राशि के कार्य निष्पादित करने की क्षमता ही नजर नहीं आती। एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “कागजों में काम दिखाकर पैसे उड़ाए जा रहे हैं। जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं हुआ।”
एक ही वेंडर को बार-बार चयन क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अलग-अलग पंचायतें बार-बार एक ही वेंडर को ही क्यों चुन रही हैं? इससे फर्जी बिलिंग, बिना काम के भुगतान या कागजों पर ही कार्य दिखाकर राशि हड़पने की आशंका गहरा गई है। सूत्रों के अनुसार, यह सब पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है।
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जांच और जिम्मेदारी की मांग
बिना ठोस सत्यापन के इतनी बड़ी राशि का भुगतान प्रशासनिक लापरवाही या सांठ-गांठ का पुख्ता सबूत है। स्थानीय नागरिकों ने उच्चस्तरीय जांच, भौतिक सत्यापन और वित्तीय ऑडिट की जोरदार मांग की है। अब सभी की नजरें प्रशासन पर टिकी हैं कि यह मामला दब जाएगा या निष्पक्ष जांच होगी। जिला प्रशासन की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

