शासकीय महाविद्यालय में दो दिवसीय सेमिनार का हुआ शुभारंभ
Betul Ki Taja Khabar/मुलताई। शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में विरासत से विकास तक श्री अन्न चुनौतियां एवं संभावनाएं विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार का सफलतापूर्वक आगाज़ हुआ। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. कमलेश कुमार सरिया एवं जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष श्री जयेश संघवी एवं आमंत्रित मुख्य वक्ताओं द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ किया गया। इस महत्वपूर्ण आयोजन में भारतीय ज्ञान परंपरा में श्री अन्न के ऐतिहासिक महत्व और आधुनिक युग में इसकी प्रासंगिकता पर गहन मंथन किया जा रहा है। सेमिनार के प्रथम दिन वक्ताओं ने श्री अन्न मिलेट्स के अत्यधिक पोषण मूल्य और स्वास्थ्य लाभों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए इसे आधुनिक जीवनशैली की बीमारियों के लिए संजीवनी बताया। तकनीकी सत्रों में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आए शिक्षाविदों ने अपने विचार रखे l
डॉ. रम्य रंजन पटेल सह-प्राध्यापक, सामाजिक विज्ञान संस्थान, जेएनयू, दिल्ली ने पारंपरिक खेती और वर्तमान खेती के बीच के अंतर की विस्तृत व्याख्या की। डॉ. शम्भू नाथ सिंह प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झाँसी ने वर्तमान कृषि में रासायनिक पदार्थों के दुष्प्रभावों को बताते हुए जैविक खाद के अधिकाधिक उपयोग की सलाह दी। डॉ. महिपाल सिंह यादव प्राध्यापक, उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल ने पर्यावरण संरक्षण के साथ कृषि के आर्थिक महत्व को समझाया। उन्होंने सामूहिक आधारित कृषि को बढ़ावा देने पर जोर दिया और मध्यप्रदेश के गेहूं की उच्च गुणवत्ता की सराहना की। डॉ. विनोद सेन सह-प्राध्यापक, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय केन्द्रीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक ने विरासत से विकास तक भारतीय ज्ञान परंपरा को संजोने की बात कही। उन्होंने प्राचीन से आधुनिक पद्धतियों तक कृषि के योगदान को रेखांकित करते हुए जल एवं पर्यावरण संरक्षण पर विशेष बल दिया। सेमिनार के दौरान होम साइंस विभाग की डॉ. दीपिका पीपरदे के मार्गदर्शन में मोटे अनाजों पर एक भव्य प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में’मेल मिलाप अपना स्टोर बैतूल से ज्योति अतुलकर ने मिलेट्स उत्पादों का स्टॉल लगाया। महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रभारी गीता मालवीय द्वारा पोषण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई और विभागीय स्टॉल भी लगाया गया।
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महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा भी मोटे अनाजों श्री अन्न पर केंद्रित उत्कृष्ट प्रदर्शनी लगाई गई। कार्यक्रम के सफल आयोजन में सेमिनार के संयोजक डॉ. बी.आर. बारस्कर की अहम भूमिका रही। मंच का कुशल संचालन डॉ. नरेंद्र कुमार हनोते द्वारा किया गया। इस अवसर पर शिशुपाल यादव जी, डॉ. के.वी. सहारे, डॉ. तिवारी सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। शोधार्थियों ने अपने शोध पत्रों के माध्यम से मिलेट्स को पुनः आम जनमानस की थाली तक पहुँचाने और किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के नवाचारों पर विचार-विमर्श किया। 12 मार्च को इस दो दिवसीय सेमिनार के दूसरे एवं समापन सत्र का आयोजन किया जाएगा, जिसमें शेष शोध पत्रों का वाचन और संपूर्ण चर्चा के निष्कर्षों पर मंथन कर भविष्य की कार्ययोजना तय की जाएगी।

