महिला चिकित्सक नहीं होने से हर दिन जिला अस्पताल रिफर हो रही गर्भवती महिलाएं
BETUL NEWS/बोरदेही (सूर्यप्रकाश शेटे)- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बोरदेही की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा चुकीं हैं। सरकारी अस्पताल सिर्फ एक चिकित्सक के सहारे चल रहा है। बोरदेही क्षेत्र में हर दिन प्रसव कराने महिला आती है और कई बार बड़ी दुर्घटना होती है। महिलाओं के डिलिवरी संबंधित केस आये दिन बोरदेही से जिला अस्पताल बैतूल रेफर किया जाता है। जिसमें बैतूल पहुंचने में लगभग 2 घंटे का सफर तय करना पड़ता है। कई बार जच्चा-बच्चा दोनों को खतरा होने की संभावना आए दिन बनी रहती है।शासन ने अस्पताल का निर्माण तो किया गया परन्तु अस्पताल का संचालन सुचारू रूप से करने के लिए आवश्यकता अनुसार चिकित्सकों का होना आवश्यक है।एक डाक्टर के भरोसे सरकारी अस्पताल चल रहा है।
महिला चिकित्सक को होनी चाहिए नियुक्ति
बोरदेही क्षेत्र एक आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है जहां दो जिलों से लगा हुआ है बोरदेही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक दिन की ओपीडी में लगभग पचास से अधिक मरीज आते हैं। जिसमें सर्दी-जुकाम बुखार के मरीज एवं गर्भवती महिलाएं भी शामिल है | बोरदेही अस्पताल में सालों से महिला एमबीबीएस डॉक्टर के नही होने से महिलाओं को बड़ी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है| प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बोरदेही में महिला डाक्टर के नहीं होने से महिला मरीज अपनी बिमारियों की जानकारी ठीक से नहीं बता पाती। अस्पताल में प्रतिदिन महिला ओपीडी लगभग सौ से एक सौ बीस रहती है। महिला एमबीबीएस डॉक्टर नहीं होने से महिलाओं को बड़ी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है|
हर बार किया जाता है बैतूल रिफर
बोरदेही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव करवानें आई गर्भवती महिलाओं को अधिकतर महिलाएं रैफर होती है। बोरदेही के वरिष्ठ संजय सूर्यवंशी प्रमोद सोनी भगवंत सिंह रघुवंशी सुजीत खंडाग्रे आनंद वाईकर नवनीत सोनी सचिन सूर्यवंशी दीपक साहू नजरपुर से भवानी प्रसाद सूर्यवंशी बामला से प्रेमनारायण मालवीय इटावा से प्रदीप सोनी ने बताया कि ग्रामीण अंचलों से गरीब मजदूर वर्ग के मरीज यहां एक उम्मीद से इलाज करवाने आते हैं सुविधा नही मिलने से मरीजों को विवश होकर आमला, बैतूल या मुलताई जाना पड़ता है जिसकी दुरी लगभग तीस से साठ किलोमीटर है। कई बार गर्भवती महिलाओं की स्थिति गंभीर होने पर आमला या बैतूल जिला चिकित्सालय रैफर किया जाता है जिससे कई महिलाएं रास्ते मे दम तोड़ चुकी है। वर्षों से बोरदेही अस्पताल में महिला डाक्टर की नियुक्ति नहीं हुई है आखिरकार क्यों बोरदेही अस्पताल को महिला एमबीबीएस डाक्टर की नियुक्ति को लेकर वंचित रखा जा रहा है।
Betul Ki Khabar -रोजगार एवं स्वरोजगार मेले का सफलतम आयोजन
विवश हो जाना पड़ता है बैतूल अस्पताल
बोरदेही क्षेत्र के परिजन शैलेंद्र यादव ने बताया कि वे अपनी धर्मपत्नी को प्रसव के लिए बोरदेही अस्पताल लेकर गए थे जहां महिला डाक्टर नहीं होने से बोरदेही अस्पताल सीधा बैतूल रैफर कर दिया था। अगर बोरदेही अस्पताल में महिला एमबीबीएस डॉक्टर होते तो बैतूल नहीं जाना पड़ेगा। जो सुविधाएं बैतूल में मिलती है वही सुविधाएं बोरदेही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी उपलब्ध होना चाहिए। जिससे क्षेत्र के मरीजों को थोड़ी राहत मिल सके।

