Betul News: मां ताप्ती की प्राचीन धरोहर पर संकट, सफाई अभियान में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

By betultalk.com

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Betul News/मुलताई। सूर्यपुत्री मां ताप्ती नदी के उद्गम स्थल पर सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं श्रद्धालुओं द्वारा चलाए गए सफाई अभियान के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने प्राचीन धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सफाई के दौरान मां ताप्ती के मूल जल प्रवाह मार्ग और प्राचीन गोमुख की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई। जानकारी के अनुसार अभियान के दौरान मां ताप्ती के प्राचीन गोमुख की साफ-सफाई की गई। स्थानीय लोगों का दावा है कि मूल रूप से मां ताप्ती नदी इसी गोमुख से निकलकर छोटे तालाब के माध्यम से नदी का स्वरूप धारण करती है। निरीक्षण में गोमुख के आसपास प्राचीन पत्थरों पर बनी नक्काशी और पुरातात्विक स्वरूप जैसी संरचनाएं दिखाई देने की बात कही गई। सफाई के दौरान गोमुख के समीप करीब 8 फीट गहरी नहरनुमा जल प्रवाह संरचना भी सामने आई, जिसे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्राचीन जल निकासी व्यवस्था और स्थापत्य कला का उदाहरण बताया। वहीं वर्तमान में जिस स्थान को स्लूज गेट कहा जा रहा है, उसे भी कुछ लोगों ने प्राचीन गोमुख व्यवस्था का हिस्सा होने का दावा किया है।

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स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मां ताप्ती के प्राचीन गोमुख की ऐतिहासिक पहचान को बदलने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि प्राचीन संरचना को नया नाम देकर उसके मूल स्वरूप को समाप्त करने की कोशिश हो रही है, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत प्रभावित हो सकती है। कुछ लोगों ने यह भी दावा किया कि गोमुख क्षेत्र के आसपास पहले मौजूद प्राचीन स्तंभों को तोड़कर अतिक्रमण किया गया है, जिससे ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। उन्होंने प्रशासन, पुरातत्व विभाग और संबंधित अधिकारियों से उच्च स्तरीय जांच, वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और धरोहर संरक्षण की मांग की है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि समय रहते संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां इस ऐतिहासिक विरासत से वंचित हो सकती हैं।

स्थानीय श्रद्धालुओं ने कहा कि मां ताप्ती केवल नदी नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और इतिहास का प्रतीक हैं, इसलिए उद्गम स्थल की प्राचीन पहचान और संरचनाओं का संरक्षण आवश्यक है।

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