20 दिनों से पेमेंट का किसान कर रहे इंतजार,,अब तो जागो सरकार
Betul News Today/भैसदेही/मनीष राठौर:- मध्यप्रदेश सरकार किसान कल्याण वर्ष मना रही हैं परन्तु वर्ष 2026 मानों किसानों के लिए मुश्किल भरा वर्ष साबित हो रहा है। खरीब सीजन में किसानों को मक्का 15 सौ रुपए कुंटल बेचनी पड़ी जिसमें किसानों की लागत तक नहीं निकल पाई। आर्थिक स्थिति से जूझ रहे हजारों किसान 30 मार्च तक सहकारिता समितियों से लिए ऋण जमा नहीं कर पाने की वजह से डिफाल्टर हो गए जिनपर भारी भरकम ब्याज लग गया। परन्तु मध्यप्रदेश सरकार द्वारा उन्हें किसी प्रकार से कोई राहत नहीं दी गई।
ऋण वसूली के नाम पर काटा गया पेमेंट 20 दिनों से अटका, किसान परेशान
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 10 अप्रैल से गेहूं खरीदी शुरू की गई। सरकार ने किसानों को भरोसा दिलाया कि गेहूं खरीदी में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जल्द से जल्द किसानों के खातों में बेची गई उपज का पैसा डाला जाएगा परन्तु वर्तमान में भैंसदेही ,चिल्कापुर,सातनेर, सहित सहकारिता समितियों में किसानों से काटा गया ऋण का पैसा नहीं आया। बात करें किसानों की समस्याओं की तो वर्तमान में भी स्लाट बुक करने में सर्वर की परेशानियों का सामना करना पड़ा,बिल बनाने में किसानों को सहकारिता समितियों के चक्कर लगाना पड़ रहा है। 14 अप्रैल को जिन किसानों ने समर्थन मुल्य पर उपज बेची उसका आधा पेमेंट 22 अप्रैल को सरकार द्वारा खातों में डाल दिया गया और 50 प्रतिशत ऋण वसूली के नाम पर काटा गया पेमेंट आज तक किसानों के खातों में नहीं पहुचा।

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सरकार की बनी नीतियों में उलझा किसान
समर्थन मुल्य पर उपज बेचने के बावजूद किसान समय पर बैंक से लिए ऋण को जमा नहीं कर पा रहा है और ऋण पर भारी भरकम ब्याज लग रहा है। अप्रैल और अब मई का ब्याज किसानों को सता रहा है सरकार ने किसानों से ऋण वसूली के नाम पर 50 प्रतिशत पेमेंट काट लिया परन्तु वह पैसा आज तक किसानों के खातों में नहीं पहुंचा और लिए गए ऋण पर ब्याज लगते जा रहा है। अब इस दौहरी नीति को लेकर किसानों में आक्रोश पनप रहा है।
किसानों का बिगड़ा बजट, साहुकारों से ऋण लेने को मजबूर
वर्तमान समय में मध्यम और निम्न वर्ग के किसानों के यहा विवाह और मांगलिक कार्यक्रम आ गये। कुछ किसानों ने मजबूरी के चलते अपनी उपज 21 सौ रुपए में ही बेंच दी। तो कुछ किसानों ने समर्थन मुल्य पर गेहूं बेच दिया परन्तु समय पर पेमेंट नहीं मिलने से अब किसानों को साहुकारों से ऋण लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। ना किसान समय पर ऋण जमा कर पा रहा है और ना समय पर आए मांगलिक कार्यक्रम कर पा रहा है लाचार किसान वर्तमान में केवल मजबूर बन कर सरकार की ओर देख रहा है। किसानों ने सरकार से जल्द समस्या हल की मांग की है।

