सब्सिडी वाले खाद के साथ जबरन अनुपयोगी उत्पादों को थमाना अपराध घोषित हो

By betultalk.com

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                                              कृषि आदान विक्रेता संघ ने पीएम के नाम समस्याओं को लेकर सौंपा ज्ञापन

Betul News Today/मुलताई। खाद बीज की समस्याओ को लेकर कृषि आदान विक्रेता संघ ने मुलताई में एक दिन की सांकेतिक हड़ताल कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम अधिकारियों के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से व्यापारियों ने बताया कि खाद बीज सहित अन्य समस्याओं से व्यापारी लंबे समय से जूझ रहे हैं तथा बार बार अधिकारियों से निवेदन किए जाने के बावजूद समस्या का समाधान नही किया जा रहा है। व्यापारियों ने कहा कि समस्या का निराकरण नही होने से व्यापारियों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। नगर के पाठक बीज भंडार, खंडेलवाल कृषि केन्द्र, वैष्णव कृषि सेवा केन्द्र, भार्गव ट्रेडिंग ऐजेन्सी, लक्ष्मी कृषि सेवा केन्द्र, महालक्ष्मी कृषि सेवा केन्द्र, शारदा सेल्स ऐजेंसी, किसान बीज भंडार, अमरूते एग्रो क्लिनिक, इंडिया बीज भंडार, ताप्ती कृषि सेवा केन्द्र, साईं इंटरप्राइजेस, कमलादेवी कृषि चिखलीकला, विजय कृषि केन्द्र दुनावा, पंवार ट्रेडर्स दुनावा, सूरजमल शिवचरण अग्रवाल, देशमुख कृषि सेवा केन्द्र, रघुवंशी ट्रेडर्स मुलताई के संचालकों ने सोमवार तहसील कार्यालय पहुंचकर संबन्धित अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।

विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग

व्यापारियों ने ज्ञापन के माध्यम से कहा है कि खाद पर जबरन लिंकिंग पर पूर्ण प्रतिबंधः उर्वरक निर्माता कंपनियों द्वारा सब्सिडी वाले खाद के साथ अनुपयोगी उत्पादों की ‘जबरन लिंकिंग’ को अपराध घोषित किया जाए। उत्तर प्रदेश सरकार के निर्णय की तर्ज पर पूरे देश में अनुदानित उर्वरक के साथ गैर-अनुदानित उत्पाद बेचने की बाध्यता पर रोक लगे। खाद की डिलीवरी डीलर के बिक्री केंद्र तक कंपनियों द्वारा सुनिश्चित की जाए। वर्तमान में यूरिया जैसे खाद की डिलीवरी रेल-हेड पर दी जा रही है, जिससे डीलरों को प्रति बैग 40 से 50 रुपये का अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ रहा है। डीलर मार्जिन में वृद्धिः बढ़ती लागत और महंगाई को देखते हुए उर्वरकों पर डीलर मार्जिन को बढ़ाकर कम से कम 8 प्रतिशत किया जाए। साथी पोर्टल में राहतः ग्रामीण खुदरा विक्रेताओं के लिए इस पोर्टल को वैकल्पिक बनाया जाए और इसकी अनिवार्यता केवल निर्माताओं एवं थोक विक्रेताओं तक सीमित रखी जाए। अवैध बीजों की बिक्री पर प्रभावी रोक लगे या अधिकृत डीलरों को विनियमित बिक्री की अनुमति दी जाए।

विक्रेता को साक्षी का दर्जा दें

खाद, बीज एवं कीटनाशक के सीलबंद पैकिंग में नमूना फेल होने पर विक्रेता को अपराधी नहीं, बल्कि केवल गवाह माना जाए। चूंकि विक्रेता जिला कृषि अधिकारी से प्राप्त लाइसेंस के आधार पर केवल सीलबंद माल बेचता है, अतः गुणवत्ता की पूर्ण जिम्मेदारी निर्माता कंपनी की होनी चाहिए। एक्सपायर्ड कीटनाशक नीतिः कंपनियों के लिए पुराने या एक्सपायर्ड स्टॉक को वापस लेना कानूनी रूप से अनिवार्य किया जाए। कानूनी संशोधन के तहत नए बीज अधिनियम और कीटनाशक विधेयक 2025 में रिटेल डीलर को प्रथम पक्ष बनाने के कठोर प्रावधान को शिथिल किया जाए।

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किसानों द्वारा झूठी शिकायतों के लिए बने कमेटी

व्यापारियों ने कहा कि किसानों द्वारा झूठी शिकायतें करते हुए व्यापारियों को ब्लैकमेल किया जाता है। ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई करने के पहले जिला स्तर पर एक कमेटी बनाई जावे उसके अनुशंसा के बाद ही कार्रवाई की जावे।
21 दिन में बहाली छोटी-मोटी बातों पर उप संचालक कृषि द्वारा लाइसेंस निलंबित किए जाने पर 21 दिन में स्वतः बहाली का प्रावधान किया जावे । हर साल पीसी जोड़ने की अनिवार्यता समाप्त हो खाद एवं बीज के लाइसेंस की अवधि 5 वर्ष एवं कीटनाशक के लाइसेंस आजीवन है ऐसी स्थिति में हर साल कंपनी के प्रिंसिपल सर्टिफिकेट जोड़ने की अनिवार्यता को समाप्त किया जावे। दोहरी लायसेंस प्रथा बन्द हो कई राज्यों में अनाज और उद्यानिकी के बीजों के लिए अलग-अलग लाइसेंस की प्रक्रिया है जबकि बीज अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है इस प्रथा को समाप्त किया जावे ।

अनिश्चितकालीन बंद की चेतावनी

व्यापारियों ने कहा कि समस्याओं के उचित निराकरण के लिए उर्वरक एवं रसायन मंत्रालय के साथ-साथ केंद्रीय कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित किया जाए कि वह आगामी एक माह में इन समस्याओं के उचित निराकरण हेतु ठोस कदम उठावें । अन्यथा हमें आगामी खरीफ सीजन के पूर्व मजबूरी में अनिश्चितकालीन बंद करना होंगे जिससे देश के कृषि उत्पादन पर विपरीत प्रभाव होने के साथ-साथ किसानों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा । ऐसी स्थिति में संपूर्ण जवाबदारी राज्य सरकारों एवं केंद्र सरकार के अधिकारियों की होगी।

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